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Download WBCHSE Class XII HINDI Notes | नशा - मुंशी प्रेमचंद | PDF Download WB Board Class 12 Hindi Notes | NASHA | Class 12 HINDI Notes | PDF | WBCHSE

Are you looking for Hindi Notes for class XII of West Bengal Board? Here this is complete notes of an important chapter of HINDI. Download the notes of the chapter 'NASHA' by Munshi Premchand. It has been prepared to help you in your exam preparation. It has questions and answers of  1 Mark and 5 Marks. Download the PDF file attached. If you find this helpful please Share with your friends and don't forget to comment below
NASHA HINDI NOTES | WEST BENGAL BOARD CLASS XII NOTES | HINDI - FIRST LANGUAGE | नशा : मुंशी प्रेमचन्द |
             
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 Short Answer Type (Mark 1)
1. “ये लोग गरीबों का खून चूसने के सिवा और करते क्या है?” - यह कथन किसका है तथा ये लोग से संकेतित पात्र कौन है?
उत्तर: यह कथन वीर का है। ये लोग से जमींदारों की ओर संकेत किया गया है।
2. नशा कहानी में ठाकुर किस प्रकार का व्यक्ति था?
उत्तर: नशा कहानी में ठाकुर लालची और मनचला किस्म का व्यक्ति था।
3. मुंशी प्रेमचंद का असली नाम क्या था?
उत्तर: धनपत राय श्रीवास्तव ।
4. वीर ने किसे कामचोर कहा?
उत्तर: मुंशी रियासत अली को।
5. “ऐसा न्याय तो किसी राज्य में नहीं देखा।“ - वक्ता कौन है?
उत्तर: प्रस्तुत अंश का वक्ता रेल में यात्रा करने वाले एक महाशय है।
6. वीर को किसकी गुस्ताखी बुरी लग रही थी?
उत्तर: खानसामों की ।
7. “तुम कौवे होकर हंस के साथ कैसे?”कौवा और हंस किसे कहा गया है?
उत्तर: वीर को कौवा एवं ईश्वरी को हंस कहा गया है।
8. “मैं सबसे पहले तुम्हें बताऊंगा” - प्रस्तुत अंश कौन, किससे कहता है?
उत्तर: प्रस्तुत अंश वीर गांव के ठाकुर साहब से कहता है।
9. वीर का बिस्तर लगाने महरा कितने बजे आया था?
उत्तर: साढ़े ग्यारह बजे।
10.मैंने निश्चय किया कि घर नहीं जाऊंगा।“- किसने घर ना जाने का निश्चय किया?

उत्तर: वीर ने दशहरे की छुट्टी में घर ना जाने का निश्चय किया। 

 Descriptive Answer Type (Marks 5) 
1. “ये लोग गरीबों का खून चूसने के सिवा और करते क्या हैं?”
संदर्भ: प्रस्तुत अंश हमारी पाठ्य पुस्तिका हिन्दी पाठ-संचयन में संकलित नशा शीर्षक कहानी से अवतरित है। इस अंश के रचयिता कथा सम्राट मुंशी प्रेमचन्द जी हैं।
प्रसंग: ईश्वरी के गाँव मुरादाबाद में एक ठाकुर था। वह कुछ मनचला व्यक्ति था, किन्तु महात्मा गांधी का परम भक्त था। वह वीर को भी महात्मा गांधी का चेला समझ कर उसका बहुत लिहाज करता था। उसने वीर से कहा कि वहाँ सुराज आ जाएगा तो जमींदार न रहेंगे। इसी प्रसंग में अपनी शान जमाने के लिए वीर ने यह बात कही।

व्याख्या: ठाकुर महात्मा गांधी का परम भक्त था। वह वीर को महात्मा गांधी का चेला समझकर बड़ा लिहाज करता था। एक दिन वह वीर को अकेला देखकर उसके पास गया और हाथ जोड़कर पूछा कि आप तो गांधीजी के चेले हैं, लोग कहते हैं कि यहां सुराज हो जाएगा तो जमींदार नहीं रहेंगे। वीर ने कहा कि ज़मींदारी की आवश्यकता ही क्या है? वे लोग गरीबों को का खून चूसने के सिवा और क्या करते हैं?

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NOTE : There may be some typing mistakes in the notes. So please try to rectify them with the help of your teachers. Good Luck !

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