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Download WBCHSE Class XII HINDI Notes | भाई – बहन : बंग महिला | PDF Download WB Board Class 12 Hindi Notes | BHAI- BAHAN |Class 12 HINDI Notes | PDF | WBCHSE

Are you looking for Hindi Notes for class XII of West Bengal Board? Here this is complete notes of an important chapter of HINDI. Download the notes of the chapter 'BHAI-BAHAN' by BANG MAHILA. It has been prepared to help you in your exam preparation. It has questions and answers of  1 Mark and 5 Marks. Download the PDF file attached. If you find this helpful please Share with your friends and don't forget to comment below

BHAI-BAHAN NOTES | WEST BENGAL BOARD CLASS XII NOTES | HINDI - FIRST LANGUAGE | भाई – बहन : बंग महिला 

             
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 Short Answer Type (Mark 1)

1 अंक के लिए :-
1. ‘भाई-बहन’ किस विधा की रचना है ?
उत्तर: कहानी ।
2. राजेंद्र बाला घोष का नामकरण बंग महिला किसने किया?
उत्तर: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने।
3. लेखिका राजेंद्र बाला घोष की प्रथम कहानी कौन सी है ?
उत्तर: ‘भाई-बहन’ ।
4. ‘भाई-बहन’ कहानी बाल प्रभाकर के कौन से खंड में प्रकाशित हुई?
उत्तर:  खंड-3, अंक-1 में ।
5. साहब की गाड़ी का निर्माता कौन से देश का था?
उत्तर: जर्मनी ।
6. ‘भाई-बहन’ कहानी का मूल कथ्य क्या है?
उत्तर: देश प्रेम एवं स्वदेश की भावना को विकसित करना।
7. ‘भाई-बहन’ के नाम क्या थे?
उत्तर: भाई का नाम साहब उर्फ हरिराम वर्मा तथा बहन का नाम सुंदरिया उर्फ सुंदर देई था।
8. साहब और सुंदरिया के पिता कौन थे?
उत्तर: बाबू जयरामदास।
9. “जिसके हृदय में संतोष है।  उसी ने सब कुछ भर पाया।“ - यह पंक्ति कौन किसके विषय में कहता है ?
उत्तर: प्रस्तुत अंश लेखिका राजेंद्र बाला घोष सुंदरिया के विषय में कहती है।  
10. हरिराम वर्मा बड़े होकर क्या बने ?
उत्तर: शहर के नामी वकील.
                                        
                                                 Descriptive Answer Type (Marks 5) 
  

1.“हम लोगों में यह एक भारी दोष है कि जितना कहते हैं उसका चौथाई भी नहीं कर सकते हैं।“
संदर्भ:- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य पुस्तिका हिन्दी पाठ-संचयन के भाई-बहन शीर्षक पाठ से अवतरित है। इसकी रचयिता राजेंद्रबला घोष बंग महिला हैं।  
प्रसंग:-  साहब और सुंदरिया अपने पिता बाबू जयराम दास जी के साथ मेला देखने जाते हैं। मेले में सुंदरिया एक पैसा खर्च करके स्वदेश निर्मित मिट्टी का खिलौना खरीदती है जबकि साहब पाँच आने खर्च करके जर्मनी में निर्मित एक रेलगाड़ी खरीदता है। दोनों के खिलौनों को देखकर श्रीराम सुंदरिया को बुद्धिमान एवं साहब को बेवकूफ बताते हैं।

व्याख्या:- श्री राम अपने छोटे भाई साहब को समझाते हुए कहते हैं कि आज हमारा देश किसी भी क्षेत्र में आत्मनिर्भर नहीं है। आज हम सुई-डोरा , दियासलाई आदि छोटी से छोटी वस्तुओं के लिए भी विदेशों पर निर्भर है। इन चीजों के लिए प्रतिवर्ष लाखों रुपए विदेश चले जाते हैं। हम देशी वस्तुओं के स्थान पर विदेशी वस्तुओं का उपयोग करके महानता का अनुभव करते हैं। आज अपने दीन-हीन दशा के लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं। हमारी कथनी और करनी में बहुत अंतर है। इसीलिए हम दीन से दीन और अधम से अधम होते जा रहे हैं। लोग देश हित की बातें तो करते हैं किंतु देशहित के लिए कोई काम नहीं करते। यदि उनमें से कुछ लोग ही देश हित के लिए कार्य करते तो हमारी स्थिति कुछ और होती। 
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NOTE : There may be some typing mistakes in the notes. So please try to rectify them with the help of your teachers. Good Luck !

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